उम्र गुज़र गई यह समझने समझाने में; वक़्त तो ठहरा रहता है गुज़रते हैं हम! उम्र गुज़र गई यह समझने समझाने में; वक़्त तो ठहरा रहता है गुज़रते हैं हम!
नारी तुम बँधी हो केवल अपने सपनों के संसार से। नारी तुम बँधी हो केवल अपने सपनों के संसार से।
जैसी भी हो जाएं परिस्थितियां तुम मुस्कुराकर जी लो। जैसी भी हो जाएं परिस्थितियां तुम मुस्कुराकर जी लो।
वही इहलोक-परलोक दोनों में जीवन के रंगों का आनंद लेता ! वही इहलोक-परलोक दोनों में जीवन के रंगों का आनंद लेता !
हर पल खुशी ढूँढता हूँ मैं। हर पल खुशी ढूँढता हूँ मैं।
कुछ लम्हे आज भी याद आते हैं जिन्हें हम शब्दों में बयां नहीं कर पाते । कुछ लम्हे आज भी याद आते हैं जिन्हें हम शब्दों में बयां नहीं कर पाते ।